प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों को भी मिले सरकारी वेतन : क्रिस्टोफर पॉल

Spread the love


दुर्ग 21फ़रवरी वेब वार्ता…दिल्ली उच्च न्यायालय के हालिया फैसले के बाद प्रदेश में निजी स्कूलों के शिक्षकों को सरकारी वेतनमान देने की मांग तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिस्टोफर पॉल ने इस मुद्दे को लेकर स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा है।

पॉल ने पत्र में कहा है कि प्रदेश के अधिकांश निजी स्कूलों में शिक्षकों को नियुक्ति पत्र तक नहीं दिया जाता। भविष्य निधि (पीएफ) जमा नहीं की जाती और वेतन के नाम पर शोषण किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षकों से प्रतिदिन आठ घंटे काम लिया जाता है, लेकिन “समान कार्य, समान वेतन” का सिद्धांत लागू नहीं किया जा रहा।

पॉल के अनुसार, सीबीएसई एफिलिएशन बायलॉज और शिक्षा संहिता में स्पष्ट प्रावधान है कि मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को अपने शिक्षकों और कर्मचारियों को सरकारी स्कूलों के समान वेतन, भत्ते, पेंशन व अन्य सुविधाएं देनी होंगी। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर नियमों का पालन नहीं हो रहा।

उन्होंने बताया कि निजी स्कूलों में नर्सरी कक्षाओं की फीस 25 से 30 हजार रुपए तक ली जा रही है, जबकि शिक्षकों को मात्र 5 से 8 हजार रुपए वेतन दिया जाता है। हायर सेकेंडरी स्कूलों में 50 हजार से एक लाख रुपए तक फीस वसूली जाती है, लेकिन शिक्षकों का वेतन 12 से 20 हजार रुपए तक सीमित है।

पॉल ने शिक्षा मंत्री से मांग की है कि निजी स्कूलों को सरकारी वेतनमान लागू करने, सभी शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देने, भविष्य निधि नियमित जमा करने तथा सेवा पुस्तिका संधारण सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए जाएं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *