यदि हौसला बुलंद हो तो उड़ने के लिए पंखों की जरूरत नहीं होती। इसी कथन को चरितार्थ किया है, भिलाई- दुर्ग की एक संस्था जो समाज के जरूरतमंद, मेघावी बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके सपनों को साकार करने में प्रयत्नशील है। इस संस्था का नाम है डॉक्टर अंबेडकर शिक्षामित्र सोसायटी पंजीयन क्रमांक -24
इस संस्था की आधारशिला 14 अप्रैल सन 2016 में भिलाई के कुछ प्रबुद्ध लोगों ने रखी। इसके वर्तमान में 211 नियमित सदस्य हैं।इसके अलावा भी कई लोग समय-समय पर अपने विशेष अवसरों पर संस्था को आर्थिक सहयोग/ दान करते हैं। जिस समय यह संस्था बनाई गई थी, तब किसी ने न सोचा था कि यह संस्था आगे चलकर अपनी कार्य प्रणाली से एक मिसाल कायम करेगी। संस्था की कार्य प्रणाली पूर्ण रूपेण पारदर्शी है, जिससे बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं, वह काबिले तारीफ है। इसी पारदर्शिता की वजह से लोग जुड़े हुए हैं। जिसका लाभ जरूरतमंद बच्चों को मिल रहा है।
यह संस्था डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर जी के PAY BACK TO SOCIETY के सिद्धांत पर आधारित है।बाबा साहब के कथन- शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पियेगा वह दहाड़ेगा इसी सोच को साथ लेकर चल रही यह समिति समाज के मेधावी और जरूरतमंद बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके भविष्य को संवारने का कार्य कर रही है।
प्रत्येक सफलता के पीछे कोई ना कोई सकारात्मक ऊर्जा कार्य करती है।डॉक्टर अंबेडकर शिक्षामित्र सोसाइटी की ऊर्जा है, इसके 211 नियमित व अन्य सम्मानित दानदाता जो स्वतः आर्थिक सहायता प्रदान करते हैं।
डॉक्टर अंबेडकर शिक्षामित्र सोसाइटी की 18 सदस्यों की टीम के अथक प्रयासों से यह संस्था नीति नए सोपान की ओर अग्रसर है।
एक प्रकार से देखा जाए तो यह संस्था संस्था न होकर एक परिवार की तरह है। जिसमें दानदाता अभिभावक बनकर बच्चों के भविष्य को संवार रहे हैं। जो केवल उन बच्चों के लिए मात्र परिकल्पना ही थी। यह समाज के हित में किया जा रहा एक आदर्श व अनुकरणीय कार्य है।
आज संस्था के माध्यम से 176 बच्चे लाभान्वित हुए हैं। जिनमें से 66 बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त कर आत्मनिर्भर हो गए हैं। सबसे बड़ी खुशी की बात है कि वह बच्चे भी पे बैक 2 सोसाइटी को अपने दिल में आत्मसात कर संस्था को अपना आर्थिक सहयोग दे रहे हैं। साथ ही साथ 150 से ज्यादा बच्चे उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
यह संस्था पूर्ण रूपेण पारदर्शिता के साथ काम कर रही है। सांच को आँच नहीं इसका मूल मंत्र है। पारदर्शिता व अपनेपन का एहसास लाभान्वित बच्चों को मिलता है, जिससे बच्चों में आत्मविश्वास भर जाता है। यह संस्था उन सभी बच्चों को तराश कर हीरा बनती है, जो किसी ने किसी रूप में आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं।यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि यह संस्था जीवन जीने की कला का दूसरा नाम है।जैसे-जैसे इस संस्था के बारे में लोगों को जानकारी हो रही है लोग स्वयं जुड़ते जा रहे हैं।
इस संस्था में 3000/-,5000/- 10000/- एवं 25000/- रुपयों की वार्षिक सदस्यता का मापदंड है। आज हमारे इस संस्था के 211 नियमित दानदाता है जो अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं।जिनकी वजह से यह समिति और अधिक उत्साह से कार्य कर पा रही है।
कार्यकारिणी की महिला सदस्यों को 10 से 15 बच्चों की गार्जियनशिप दी जाती है। जिससे वे नियमित रूप से बच्चों से संपर्क बनाए रखती हैं व उनकी प्रगति की जांच करती रहती हैं।
अंत में यह बताना लाजिमी होगा कि शिक्षा ही एकमात्र ताकत है जिससे लोगों की जीवन शैली एवं समाज में सकारात्मक बदलाव आ सकता है।
जिस तरह बच्चे इस संस्था के द्वारा अपनी सफलता का दीपक जलाकर नाम रोशन कर रहे हैं। उन्हें मालूम है कि महत्वपूर्ण यह नहीं की हर बच्चे को पढ़ाया जाना चाहिए, महत्वपूर्ण यह है कि हर बच्चे को जीवन जीने की कला सिखाना चाहिए।
आज यह संस्था बाबा साहब के विचारों को (शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो) शिक्षा रूपी ताकत को लेकर उनके पदचिन्होँ पर चल रही है। बेशक आगे और प्रभावशाली होगी। हम सभी लोगों से आग्रह करते हैं कि इस परिवार से ज्यादा से ज्यादा जुड़कर अपना योगदान दें।
कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता।
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।।
🙏🙏नमो बुद्धाय जय भीम🙏🙏
