भिलाई 10 फ़रवरी वेब वार्ता त्याग,समर्पण,सेवा एवं नारी चेतना की प्रेरक और भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ.बाबासाहेब अम्बेडकर की जीवन संगिनी रमा आई अम्बेडकर की जन्म जयंती सेक्टर 6 भिलाई के बुद्ध विहार में महाबोधी महाविहार मुक्ति आंदोलन महिला प्रकोष्ठ के तत्वाधान में मई गई। वास्तव में एक पुरुष की सफलता के पीछे महिला का हाथ होता है ,रमा अम्बेडकर ने यह साबित कर दिखाया ।अपने मंचस्थ आसीन रहें मुख्य अतिथि नरेंद्र मेश्राम गोंदिया महाराष्ट्र,संदीप कोल्हटकर राजनांदगांव, डॉ.अरविंद चौधरी दुर्ग, सुशील गणवीर गोंदिया,सविता बौद्ध संकल्पी दुर्ग, वर्षा बागड़े भिलाई । कार्यक्रम की प्रस्तावक अल्का बौद्ध और कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. सरोज बौद्ध ने की और कार्यक्रम का संचालन जयश्री बौद्ध और ज्योति बौद्ध ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत नन्हें भीम सैनिक यथार्थ सम्राट भारतीय ने अपने भाषण में रमाई के कष्टों के साथ ही डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर के तीन गुरु तथागत बुद्ध,संत कबीर और महामना ज्योतिबाराव फुले के क्रांतिकारी विचारों को रखकर अपनी ओजस्वी वाणी से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ.अरविंद चौधरी ने समाज संगठन की आवश्यकता पर अपने बात रखते हुए रमाई के समर्पण भाव को स्मरण कराए। संदीप कोल्हटकर ने रमा आई अम्बेडकर के जीवन जीवन पर विचार रखते हुए बौद्ध समाज को रमा जैसा जीवन सभी के लिए अनुकरणीय है बताया। सुशील गणवीर ने रमा आई के जीवन पर मार्मिक संभाषण किया। मुख्य अतिथि नरेंद्र मेश्राम ने रमा अम्बेडकर सेवा त्याग के साथ ही भारत की सामाजिक,राजनैतिक दशा और दिशा पर बात रखते हुए यूजीसी का समर्थन किया। मंगला गेडाम,प्रणाली, संगीता ,नीतू ,सुलोचना बौद्ध,केसर रामटेके,राजू मेश्राम ने अपने गीतों की प्रस्तुति दी। सविता बौद्ध "संकल्पी" के मिशनरी गीतों को समूहगान में गाकर समाज को सदैव जागृत रहने का संदेश दिया । दि बुद्धिष्ट प्रचारक विंग छत्तीसगढ़ की संस्थापिका सविता बौद्ध संकल्पी द्वारा और नवदृष्टि फाउंडेशन के सहयोग से बौद्ध समाज के 25 लोगों द्वारा मरणोपरांत देहदान व नेत्रदान के घोषणार्थियों को सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अनिल रंगारी ,आशा जुल्मे, हर्षिला रंगारी,स्नेहा मेश्राम,विशाखा कुर्रे,रेशमा आनंद, विजया ज़मुरिया,सुनंदा गजभिए,अनिल जोग, सुधेश कुमार, वी. एन.राव, रवि गाडगे, शिवचरण पंतवाने,विनोद टेंभरे,एच पी नंदगावली,महेंद्र बौद्ध,यशवंत रामटेके,सुभाष बंसोडकर,महेंद्र रामटेके, तारक सतदेवे,प्रतिभा,कविता चौथे,राहुल चौरे,ऊषा मेश्राम,हरीश भोते,रंजू खोबरागड़े,महेंद्र खोबरागड़े,सुरेश लक्ष्मी गोंडाने,सविता कमल मेश्राम, खुशबू बौद्ध,कविता जामभूलकर कनकलता वैद्य,प्रज्ञा घरड़े,युवराज गजभिए,श्वेता मेश्राम,धीरज धोटे लुंबिनी गजभिए,मीरा बनसोडे,लतिका खांडेकर अतुल घरडे ,के के चौहान, शुभांगी गजभिए, सुभाष मेश्राम और बौद्ध समाज उपस्थित रहा।*