दुर्ग 7 सितंबर वेबवार्ता..महाविहार बोधगया मुक्ति आंदोलन राष्ट्रीय समिति बोधगया के तत्वावधान में समूचे विश्व के बौद्ध अनुयायियों के श्रद्धा का केंद्र विश्व धरोहर महाबोधि महाविहार बोधगया का प्रबंध बौद्ध अनुयायियों को प्राप्त करने हेतु बिहार राज्य की राजधानी पटना में बिहार राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी के आवास के सामने दिनांक 23 अगस्त 2026 से 27 अगस्त 2026 तक पांच दिवसीय भूख हड़ताल किया जाना नियत था। जिसमें भारत के समूचे प्रांत के लोग शरीक हुए। महाबोधि महाविहार बोधगया का निर्माण 260 ईसा पूर्व देवनाम प्रियदर्शी बौद्ध सम्राट अशोक ने अपने मौर्य वंश के शासन काल में बनाया था जो दुनिया के समूचे बौद्ध उपासक उपाशिकाओं का श्रद्धा का केंद्र है। बुद्धिस्ट मिशनरी श्रीलंका निवासी अनागरिक धर्मपाल जी ने महाबोधि महाविहार बोधगया का प्रबंध बौद्ध अनुयायियों को कानूनी तौर पर प्राप्त करने हेतु सर्वप्रथम प्रयास किया 1895 में तत्कालीन न्यायालय कोलकाता में याचिका पेश की थी 1895 के दरम्यान अंग्रेजी हुकूमत थी आंदोलन निरंतर चलता रहा तत्कालीन समय में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की ओर से डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद व पंडित गोविंद वल्लभ पंत ने अनागरिक धर्म पाल जी को आश्वासन दिया कि भारत आजाद होने पर महाबोधि महाविहार बोधगया का प्रबंधन बौद्ध अनुयायियों के हाथों सोफा जाएगा किंतु 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद होने के उपरांत भी बौद्ध अनुयायियों को प्रबंधन नहीं सोपा गया। तथा भारत के प्रथम राष्ट्रपति के नेतृत्व में बिहार सरकार ने बोधगया टेंपल मैनेजमेंट कमेटी एक्ट 1949 बनाया गया। जिसमें चार गैर बुद्धिस्ट चार बुद्धिस्ट और एक पदेन अध्यक्ष कलेक्टर होगा उक्त ऐतिहासिक महाबोधि महाविहार बोधगया का प्रबंधन बौद्धो को सौंपा नहीं गया। समय-समय पर केंद्र व राज्य सरकार के समक्ष बुद्ध/ अंबेडकर मिशन के लोगों ने रखा किंतु प्रबंधन गैर बुद्धिस्ट लोगों के हाथों में ही रहा। जिसकी वजह से महाबोधि महाविहार बोधगया का प्रबंधन पूर्ण रूप बौद्धों के हाथों में सौंपने, इस बात को मद्देनजर रखते हुए बी.टी. एक्ट- 1949 को निरस्त करने के पूज्य भदंत अनागरिक धर्मपाल जी के पश्चात बौद्धो ने न्यायालय दिल्ली में रिट पिटीशन क्रमांक 380/2012 पेश की किंतु प्रबंधन बौद्ध अनुयायियों को प्राप्त नहीं हुआ।
उक्त याचिका के समर्थन में 6 वर्ष उपरांत महत्वपूर्ण साक्ष्यों के साथ पूज्य भदंत धम्म शिखर जी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महाबोधि महाविहार बोधगया मुक्ति आंदोलन राष्ट्रीय समिति बोधगया के द्वारा वर्ष 2018 को इंटरवेंशन पिटीशन क्रमांक 91048/2018 पेश की पूज्य भदंत धम्म शिखर जी द्वारा याचिका प्रस्तुत की सर्वोच्च न्यायालय में नियत पेशीयों पर अधिकृत अधिवक्ता के साथ उपस्थित होते रहे महाबोधि महाविहार बोधगया मुक्ति आंदोलन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष भदंत प्रज्ञशील महाथेरों, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पूज्य भदंत धम्म शिखरजी, राष्ट्रीय महासचिव डॉक्टर आकाश लामा जी, अनिश्चितकालीन धरना प्रभारी भंते सुनीत पाल जी पटना, डॉ. चंद्रबोधि पाटिल जी, राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय बौद्ध महासभा, सुनील सारिपुत्र जी राष्ट्रीय अध्यक्ष, समता सैनिक दल के नेतृत्व में यह आंदोलन जनमानस का आंदोलन बन गया और संपूर्ण देश के बौद्ध अनुयायियों ने बी.टी. एक्ट- 1949 को निरस्त करने के लिए अपने-अपने स्तर पर आंदोलन किया। विगत दिनों दिनांक 10 अगस्त 2026 को दिल्ली के जंतर-मंतर में भी आंदोलन किया गया, किंतु कुंभकरण की तरह नींद में सोई सरकार जाग नहीं पाई। महाबोधि महाविहार बोधगया मुक्ति आंदोलन समिति द्वारा तत्कालीन बिहार सरकार के द्वारा बनाया गया बी.टी. एक्ट- 1949 को निरस्त करने हेतु 23 अगस्त 2026 से 27 अगस्त 2026 तक पांच दिवसीय भूख हड़ताल बिहार राज्य की राजधानी पटना में माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी के निवास स्थान के सामने प्रारंभ किया गया तो आंदोलन के प्रथम दिन ही बिहार राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी ने महाबोधि महाविहार बोधगया मुक्ति आंदोलन राष्ट्रीय समिति के प्रतिनिधि मंडल को आवास पर आमंत्रित किया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष पूज्य भदंत प्रज्ञाशिल जी, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. आकाश लामा जी, भंते सुनीत पाल थेरो जी, सिक्किम राज्य के समन्वयक लामा ओगदी पिंसो, पटना कलेक्टर के माध्यम से भेंट किया गया। प्रतिनिधि मंडल को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी के द्वारा आश्वासन दिया गया कि महाबोधि महाविहार बोधगया बौध्द अनुयायियों का है। इस संबंध में सरकार प्रमुखता से विचार करेगी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी के आश्वासन उपरांत हड़ताल को समिति के द्वारा निरस्त किया गया। महाबोधि महाविहार बोधगया मुक्ति आंदोलन समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व महाबोधि महाविहार बोधगया मुक्ति हेतु सुप्रीम कोर्ट में याचिका कर्ता पूज्य भदंत धम्म शिखर जी ने बताया कि सरकार महाबोधि महाविहार बोधगया का प्रबंधन बौद्ध अनुयायियों को अविलंब नहीं सौंपा तो दिल्ली में बड़ा आंदोलन भविष्य में किया जाएगा। महाबोधि महाविहार बोधगया मुक्ति आंदोलन समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व मध्य प्रदेश प्रभारी पूज्य भदंत धम्म शिखर जी ने समूचे बौद्ध अनुयायियों से अनुरोध किया कि यह आंदोलन बौद्ध की अस्मिता वह स्वाभिमान से जुड़ा आंदोलन है हम गैर बुद्धिस्ट लोगों से मुक्त करा कर ही दम लेंगे।
पूज्य भदंत धम्मतप जी राष्ट्रीय सलाहकार एवं छत्तीसगढ़ प्रदेश प्रभारी, सविता बौद्ध, प्रदेश अध्यक्ष दुर्ग, चेतना तभाने प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बिलासपुर, सुजाता वाहने प्रदेश उपाध्यक्ष बिलासपुर, बुद्ध मित्रा वासनिक प्रदेश उपाध्यक्ष राजनांदगांव, लता बौद्ध प्रदेश उपाध्यक्ष कोरबा, शैलेश चहांदे प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्ग, जय श्री बौद्ध प्रदेश कोषाध्यक्ष भिलाई, दिलीप रामटेक प्रदेश सह- कोषाध्यक्ष दुर्ग, बसंत बौद्ध प्रदेश सचिव बिलासपुर, अशोक मेश्राम प्रदेश सह सचिव दुर्ग, डॉ. अरविंद चौधरी प्रदेश विधिक सलाहकार दुर्ग, अनिल जोग प्रदेश प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी दुर्ग, प्रदेश सलाहकार भोजराज गौरखेड़े रायपुर, संदीप कोल्हाटकर राजनांदगांव, प्रकृति बौद्ध बिलासपुर, अनामिका पाटिल बिलासपुर, मुकेश गोंडाले बिलासपुर, डॉक्टर सुरेंद्र बौद्ध बिलासपुर, विजय बोरकर दुर्ग, सुलोचना बौद्ध दुर्ग, अलका बौद्ध भिलाई, डॉक्टर सरोज बौद्ध भिलाई, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुशीला डहाट गेवरा रोड कोरबा, ललिता वाहने बिलासपुर, रुकमणी रामटेके रायपुर, आदि पदाधिकारीयो ने केंद्र व राज्य सरकार से आवाहन किया कि महाबोधि महाविहार बोधगया बौद्धों को सौपा जाए
उक्ताशय की जानकारी प्रदेश सह सचिव अशोक मेश्राम ने दी।
